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पॉली हाउस तकनीक से खीरे की खेती कर किसान कमा रहा बेहतरीन मुनाफा

पॉली हाउस तकनीक से खीरे की खेती कर किसान कमा रहा बेहतरीन मुनाफा

पॉली हाउस में खीरे का उत्पादन करने पर बारिश, आंधी, लू, धूप और सर्दी का प्रभाव नहीं होता है। आप किसी भी मौसम में पॉली हाउस के भीतर किसी भी फसल का उत्पादन कर सकते हैं। खीरा खाना प्रत्येक व्यक्ति को अच्छा लगता है। साथ ही, खीरा में आयरन, फास्फोरस, विटामिन ए, विटामिन बी1, विटामिन बी6, विटामिन सी,विटामिन डी और पौटेशियम भरपूर मात्रा में विघमान रहता है। नियमित तौर पर खीरे का सेवन करने पर शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। साथ ही, खीरे में बहुत ज्यादा फाइबर भी पाया जाता है। खीरे से कब्ज की परेशानी से छुटकारा मिलता है। यही कारण है, कि बाजार में खीरे की मांग वर्षों बनी रहती है। अब ऐसी स्थिति में मांग को पूर्ण करने के लिए किसान पॉली हाउस के भीतर खीरे का उत्पादन कर रहे हैं। इससे किसानों को अच्छी-खासी आमदनी हो रही है।

पॉली हाउस फसल को विभिन्न आपदाओं से बचाता है

वास्तव में पॉली हाउस में खीरे की खेती करने पर ताप, धूप, बारिश, आंधी, लू और ठंड का प्रभाव नहीं पड़ता है। आप किसी भी मौसम में पॉली हाउस के भीतर किसी भी फसल की खेती आसानी से कर सकते हैं। इससे उनका उत्पादन भी बढ़ जाता है और किसान भाइयों को मोटा मुनाफा प्राप्त होता है। इसी कड़ी में एक किसान हैं दशरथ सिंह, जिन्होंने पॉली हाउस तकनीक के जरिए खेती शुरू कर लोगों के सामने नजीर पेश की है। दशरथ सिंह अलवर जनपद के इंदरगढ़ के निवासी हैं। वह लंबे वक्त से पॉली हाउस के भीतर खीरे का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उनको काफी अच्छी आमदनी भी अर्जित हो रही है। ये भी देखें: नुनहेम्स कंपनी की इम्प्रूव्ड नूरी है मोटल ग्रीन खीरे की किस्म

किसान खीरे की कितनी उपज हांसिल करता है

दशरथ सिंह पूर्व में पारंपरिक विधि से खेती किया करते थे। उनको पॉली हाउस के संदर्भ में कोई जानकारी नहीं थी। एक दिन उनको उद्यान विभाग के संपर्क में आकर उनको पॉली हाउस तकनीक से खेती करने की जानकारी प्राप्त हुई है। इसके पश्चात उन्होंने 4000 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में पॉली हाउस का निर्माण करवाया और उसके अंदर खीरे का उत्पादन चालू कर दिया।

बहुत सारे किसान पॉली हाउस तकनीक से खेती करते हैं

किसान दशरथ सिंह का कहना है, कि पॉली हाउस की स्थापना करने पर उनको 15 लाख रुपये का खर्चा करना पड़ा। हालांकि, सरकार की ओर से उनको 23 लाख 50 हजार का अनुदान भी मिला था। उनको देख कर फिलहाल जनपद में बहुत सारे किसान भाइयों ने पॉली हाउस के भीतर खेती शुरू कर दी है।

लखन यादव ने पॉली हाउस तकनीक को लेकर क्या कहा

साथ ही, दशरथ सिंह के बेटे लखन यादव का कहना है, कि हम पॉली हाउस के भीतर केवल खीरे की ही खेती किया करते हैं। विशेष बात यह है, कि वह पॉली हाउस के भीतर सुपर ग्लो-बीज का उपयोग करते हैं, इससे फसल की उन्नति एवं प्रगति भी शीघ्र होती है। उनका यह भी कहना है, कि उन्हें एक बार की फसल में 60 से 70 टन खीरे की उपज अर्जित हुई थी। वहीं, एक फसल तैयार होने में करीब 4 से 5 माह का समय लगता है। बतादें, कि 60 से 70 टन खीरों का विक्रय कर वे 12 लाख रुपये की आय कर लेते हैं। इसमें से 6 लाख तक का मुनाफा होता है।
सरकारी नौकरी को छोड़कर मुकेश पॉलीहाउस के जरिए खीरे की खेती से मोटा मुनाफा कमा रहा है

सरकारी नौकरी को छोड़कर मुकेश पॉलीहाउस के जरिए खीरे की खेती से मोटा मुनाफा कमा रहा है

आपकी जानकारी के लिए बतादें कि युवा किसान मुकेश का कहना है, कि नेट हाउस निर्मित करने के लिए सरकार की ओर से अनुदानित धनराशि भी मिलती है। शुरुआत में नेट हाउस स्थापना के लिए उसे 65% की सब्सिडी मिली थी। हालांकि, वर्तमान में हरियाणा सरकार ने अनुदान राशि को घटाकर 50% कर दिया है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि आज भी सरकारी नौकरी के पीछे लोग बिल्कुल पागल हो गए हैं। प्रत्येक माता- पिता की यही चाहत होती है, कि उसकी संतान की सरकारी नौकरी लग जाए, जिससे कि उसकी पूरी जिन्दगी सुरक्षित हो जाए। अब सरकारी नौकरी बेशक निम्न स्तर की ही क्यों न हो। परंतु, आज हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बात करेंगे, जो कि अच्छी-खासी सरकारी नौकरी को छोड़ अब गांव आकर खेती कर रहा है।

किसान मुकेश कहाँ का रहने वाला है

दरअसल, हम जिस युवा किसान के संबंध में बात करने जा रहे हैं, उसका नाम मुकेश कुमार है। मुकेश हरियाणा के करनाल जनपद का रहने वाला है। पहले वह हरियाणा बोर्ड में सरकारी नौकरी करता था। नौकरी के दौरान मुकेश को प्रति महीने 45 हजार रुपये सैलरी मिलती थी। परंतु, इस सरकारी कार्य में उसका मन नहीं लगा, तो ऐसे में उसने इस नौकरी को लात मार दी। आज वह अपनी पुश्तैनी भूमि पर नेट हाउस विधि से खेती कर रहा है, जिससे उसको काफी अच्छी कमाई हो रही है।

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किसान मुकेश लोगों को रोजगार मुहैय्या करा रहा है

किसान मुकेश अन्य बहुत से किसानो के लिए भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। किसान मुकेश का कहना है, कि उसने अपनी भूमि पर चार नेट हॉउस तैयार कर रखे हैं। इनके अंदर किसान मुकेश खीरे की खेती करते हैं। किसान मुकेश के मुताबिक खीरे की मांग गर्मियों में काफी ज्यादा बढ़ जाती है। अब ऐसे में किसान मुकेश लगभग 2 वर्षों से खीरे की खेती कर रहा। बतादें कि इससे किसान मुकेश को काफी अच्छी कमाई हो रही है। यही वजह है, कि वह आहिस्ते-आहिस्ते खीरे की खेती का रकबा और ज्यादा बढ़ाते गए हैं। इसके साथ साथ मुकेश ने अपने आसपास के बहुत से लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है।

खीरे की वर्षभर खेती की जा सकती है

मुकेश का कहना है, कि एक नेट हाउस निर्मित करने के लिए ढ़ाई से तीन लाख रुपये की लागत आती है। परंतु, इसके अंदर खेती करने पर आमदनी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। युवा किसान का कहना है, कि खीरे की बहुत सारी किस्में हैं, जिसकी नेट हाउस के अंदर सालों भर खेती की जा सकती है।

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ड्रिप विधि से सिंचाई करने पर जल की काफी कम बर्बादी होती है

किसान मुकेश का कहना है, कि उनको खीरे की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह लगी है कि इसकी खेती में जल की काफी कम खपत होती है। दरअसल, नेट हॉउस में ड्रिप विधि के माध्यम से फसलों की सिंचाई की जाती है। ड्रिप विधि से सिंचाई करने से जल की बर्बादी बेहद कम होती है। इसके साथ ही पौधों की जड़ो तक पानी पहुँचता है। किसान मुकेश अपने खेत में पैदा किए गए खीरे की सप्लाई दिल्ली एवं गुरुग्राम समेत बहुत सारे शहरों में करता है। वर्तमान में वह 15 रूपए किलो के हिसाब से खीरे बेच रहा है।
इस राज्य में पॉलीहाउस और शेड नेट पर 50% प्रतिशत सब्सिड़ी दी जा रही है

इस राज्य में पॉलीहाउस और शेड नेट पर 50% प्रतिशत सब्सिड़ी दी जा रही है

केंद्र और राज्य सरकार अपने अपने स्तर से कृषकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विभिन्न प्रयास करती रहती हैं। खेती किसानी के विकास और किसानों की आमदनी को दोगुना करने के उद्देश्य से सरकार आए दिन नई-नई योजनाओं को जारी करती रहती है। 

अब इसी कड़ी में बिहार सरकार किसानों के लिए एक और नई योजना लेकर आई है। दरअसल, सरकार ने संरक्षित खेती द्वारा बागवानी विकास योजना के अंतर्गत पॉलीहाउस और शेड नेट की व्यवस्था  उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

सरकार पॉलीहाउस और शेड नेट के माध्यम से खेती करने पर किसानों को अच्छा खासा अनुदान मुहैय्या करा रही है। सरकार के इस निर्णय से किसानों की आमदनी के साथ-साथ उत्पादन में भी इजाफा होगा। 

योजना के अंतर्गत कितना अनुदान दिया जाएगा ?

योजना की जानकारी बिहार कृषि विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है। कृषि विभाग की पोस्ट के अनुसार, सरकार संरक्षित खेती द्वारा वार्षिक बागवानी विकास योजना के अंतर्गत पॉलीहाउस और शेड नेट की मदद से खेती करने पर कृषकों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान कर रही है।

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इसमें किसानों को प्रति वर्ग मीटर की इकाई लगाने के लिए 935 रुपये के खर्च में से 50 फीसद मतलब 467 रुपये दिए जाएंगे तथा शेड नेट के लिए प्रति वर्ग मीटर की इकाई 710 रुपये में से 50% फीसद यानी 355 रुपये दिए जाएंगे। 

पॉलीहाउस और शेड नेट किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है ? 

यदि आप भी एक किसान हैं और पॉलीहाउस और शेड नेट तकनीक को अपनाकर खेती करने की सोच रहे हैं, तो इससे आपको बेहद लाभ होने वाला है। दरअसल, खेती की ये तकनीक फसलों को कीटों के हमलों से बचाती है। 

इस तकनीक का इस्तेमाल करने से कीट आक्रमण में 90% प्रतिशत तक की कमी आती है। पॉलीहाउस और शेड नेट तकनीक के जरिए आप वर्षों-वर्ष सुरक्षित तरीके से खेती कर सकते हैं। 

योजना का फायदा लेने के लिए कैसे करें आवेदन ?

योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होम पेज पर उद्यान निदेशालय अंतर्गत संचालित योजनाओं का लाभ लेने के लिए Online Portal के ऑप्शन पर क्लिक करें।

वहां संरक्षित खेती द्वारा बागवानी विकास योजना के लिए आवेदन पर क्लिक करें। इसके बाद आपके सामने नए पेज पर कुछ नियम और शर्तें आएंगी। 

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अब इन नियम और शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़कर जानकारी से सहमत वाले ऑप्शन पर क्लिक करें। ऐसा करते ही आपके सामने आवेदन फॉर्म खुल जाएगा। अब मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी को ध्यानपूर्वक भरें। 

इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करें। दस्तावेज अपलोड करते ही सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करें। इस प्रकार आप सफलतापूर्वक इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन हो जाएगा। 

किसान अधिक जानकारी के लिए यहां करें संपर्क

योजना से संबंधित ज्यादा जानकारी के लिए किसान भाई बिहार कृषि विभाग, बागवानी निदेशालय की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। 

इसके अलावा, स्थानीय जनपद के उद्यान विभाग के सहायक निदेशक से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।